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Social media अपने blog को दुनिया के सामने लाने का एक बहुत बेहतरीन तरीका है. Platform जैसे Facebook, Instagram, Linkedin, Twitter आदि बहुत ही अच्छे traffic source बन सकते हैं. लेकिन यह सब करने के लिए एक अच्छी strategy की जरूरत होती है
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इंटरनेट गैजेट्स और मीडिया के सुरक्षित उपयोग आवश्यक इंटरनेट सुरक्षा युक्तियाँ 1: सुनिश्चित करें कि आपका इंटरनेट कनेक्शन सुरक्षित है जब आप किसी सार्वजनिक स्थान पर ऑनलाइन जाते हैं, उदाहरण के लिए, सार्वजनिक वाई-फ़ाई कनेक्शन का उपयोग करते हुए, तो इसकी सुरक्षा पर आपका कोई प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं होता है। सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करना हमेशा सुरक्षित नहीं होता है

  • लेकिन जब आप कहीं बाहर हों तो इससे बचा नहीं जा सकता है। यदि आप सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग कर रहे हैं, तो ऑनलाइन बैंकिंग या ऑनलाइन खरीदारी जैसे व्यक्तिगत लेन-देन करने से बचें। 2: मजबूत पासवर्ड चुनें जब साइबर सुरक्षा की बात आती है तो पासवर्ड सबसे बड़े कमजोर बिंदुओं में से एक होते हैं। लोग अक्सर ऐसे पासवर्ड चुनते हैं जिन्हें याद रखना आसान हो - और इसलिए, हैकर्स के लिए अनुमान लगाना आसान हो। इसके अलावा, कई साइटों के लिए एक ही पासवर्ड का उपयोग करने से उपयोगकर्ताओं को जोखिम होता है - क्योंकि यदि हैकर्स एक साइट से आपकी साख प्राप्त करते हैं,
एक ऑथेंटिकेशन मेथड है जो यूजर्स को ऑनलाइन अकाउंट एक्सेस करने के लिए दो या ज्यादा वेरिफिकेशन मेथड्स
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तो वे संभावित रूप से अन्य साइटों तक पहुंच सकते हैं जो एक ही लॉगिन का उपयोग करते हैं। 3: जहाँ आप कर सकते हैं बहु-कारक प्रमाणीकरण सक्षम करें मल्टीफैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) एक ऑथेंटिकेशन मेथड है जो यूजर्स को ऑनलाइन अकाउंट एक्सेस करने के लिए दो या ज्यादा वेरिफिकेशन मेथड्स मुहैया कराने के लिए कहता है। उदाहरण के लिए, केवल उपयोगकर्ता नाम या पासवर्ड मांगने के बजाय, बहु-कारक प्रमाणीकरण अतिरिक्त जानकारी का अनुरोध करके आगे बढ़ता है

  • जैसे कि: एक अतिरिक्त वन-टाइम पासवर्ड जिसे वेबसाइट के प्रमाणीकरण सर्वर उपयोगकर्ता के फोन या ईमेल पते पर भेजते हैं। व्यक्तिगत सुरक्षा सवालों के जवाब। एक फिंगरप्रिंट या अन्य बायोमेट्रिक जानकारी, जैसे आवाज या चेहरे की पहचान। मल्टीफैक्टर ऑथेंटिकेशन से सफल साइबर हमले की संभावना कम हो जाती है। अपने ऑनलाइन खातों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए, जहाँ संभव हो बहु-कारक प्रमाणीकरण लागू करना एक अच्छा विचार है। आप इंटरनेट सुरक्षा में सहायता के लिए Google प्रमाणक और Authy जैसे तृतीय-पक्ष प्रमाणक ऐप का उपयोग करने पर भी विचार कर सकते हैं
आप नवीनतम सुरक्षा पैच से लाभान्वित होते हैं। यह उन ऐप्स के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है
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#4: सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को अप-टू-डेट रखें अपने ऑपरेटिंग सिस्टम और आपके द्वारा उपयोग किए जाने वाले किसी भी ऐप के साथ अप-टू-डेट रहें। डेवलपर्स उत्पादों को सुरक्षित बनाने, नवीनतम खतरों की निगरानी करने और कमजोरियों के मामले में सुरक्षा पैच को रोल आउट करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। अपने ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स के नवीनतम संस्करणों का उपयोग करके, आप नवीनतम सुरक्षा पैच से लाभान्वित होते हैं। यह उन ऐप्स के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिनमें भुगतान, स्वास्थ्य या अन्य संवेदनशील जानकारी होती है। #5: जांचें कि वेबसाइटें विश्वसनीय दिखती और महसूस होती हैं

  • आपके द्वारा देखी जाने वाली किसी भी वेबसाइट के लिए, लेकिन विशेष रूप से जिनके साथ आप लेन-देन करते हैं, जैसे कि ई-कॉमर्स साइटें, यह महत्वपूर्ण है कि वे विश्वसनीय हों। देखने के लिए एक प्रमुख तत्व अप-टू-डेट सुरक्षा प्रमाणपत्र है - ऐसे URL की तलाश करें जो 'HTTP' के बजाय 'HTTPS' से शुरू होते हैं ('s' का अर्थ 'सुरक्षित' है) और पते के भीतर एक पैडलॉक आइकन है छड़। अन्य विश्वास संकेतों में शामिल हैं: पाठ जो वर्तनी और व्याकरण की गलतियों से मुक्त है - प्रतिष्ठित ब्रांड यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि उनकी वेबसाइट अच्छी तरह से लिखी गई और प्रूफरीड हो। ऐसी छवियां जो पिक्सेलयुक्त नहीं हैं और जो स्क्रीन की width में फिट बैठती हैं

सोशल मीडिया: समस्या व समाधान

इस Editorial में The Hindu, The Indian Express, Business Line आदि में प्रकाशित लेखों का विश्लेषण किया गया है। इस लेख में सोशल मीडिया व उससे संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है। आवश्यकतानुसार, यथास्थान टीम दृष्टि के इनपुट भी शामिल किये गए हैं।

संदर्भ 

कुछ दिन पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका में एक अफ्रीकी-अमेरिकी युवक की मृत्यु के बाद बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शन को दौर प्रारंभ हो गया। यह हिंसक विरोध प्रदर्शन स्वतः परंतु सोशल मीडिया द्वारा विनियोजित था। हमने पूर्व में अरब की सड़कों पर शुरू हुए प्रदर्शनों (जिसने कई तानाशाहों की सत्ता को चुनौती दी) में भी सोशल मीडिया के व्यापक प्रभाव का अनुभव किया है। सोशल मीडिया के माध्यम से लोग अपने विचारों को एक-दूसरे के साथ साझा कर एक नई बौद्धिक दुनिया का निर्माण कर रहे हैं।

वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का एक अहम पहलू है। इस अधिकार के उपयोग के लिये सोशल मीडिया ने जो अवसर नागरिकों को दिये हैं, एक दशक पूर्व उनकी कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी। दरअसल, इस मंच के ज़रिये समाज में बदलाव की बयार लाई जा सकती है। लेकिन, चिंता का विषय है कि मौजूदा वक्त में सोशल मीडिया अपनी आलोचनाओं के लिये चर्चा में रहता है। दरअसल, सोशल मीडिया की भूमिका सामाजिक समरसता को बिगाड़ने और सकारात्मक सोच की जगह समाज को बाँटने वाली सोच को बढ़ावा देने वाली हो गई है।  

इस आलेख में सोशल मीडिया, उसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव, भारत में स्थिति, सोशल मीडिया व निजता के अधिकार में संतुलन और सोशल मीडिया के विनियमन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

सोशल मीडिया से तात्पर्य  

  • ‘सामाजिक संजाल स्थल’ (social networking sites) आज के इंटरनेट का एक अभिन्न अंग है जो दुनिया में एक अरब से अधिक लोगों द्वारा उपयोग किया जाता है। यह एक ऑनलाइन मंच है जो उपयोगकर्ता को एक सार्वजनिक प्रोफाइल बनाने एवं वेबसाइट पर अन्य उपयोगकर्ताओं के साथ सहभागिता करने की अनुमति देता है। 
  • प्रोफाइल का उपयोग अपने विचारों को साझा करने, पहचान के लोगों या अजनबियों से बात करने में किया जाता है। उदाहरण - फेसबुक, ट्विटर आदि इस संपूर्ण प्रक्रिया में वेबसाइट पर उपलब्ध उपयोगकर्ता की निजी सूचनाएँ भी साझा हो जाती हैं।  
  • यह पूरी प्रक्रिया सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित होती है, जहाँ विभिन्न प्रकार के सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है। उपयोग के बहु-विविध तरीके और तकनीकी निर्भरता ने ‘सामाजिक संजाल स्थल’ को विभिन्न प्रकार के ख़तरों के प्रति सुभेद्य किया है। 

सोशल मीडिया के सकारात्मक प्रभाव 

  • सोशल मीडिया दुनिया भर के लोगों से जुड़ने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है और इसने विश्व में संचार को नया आयाम दिया है। 
  • सोशल मीडिया उन लोगों की आवाज़ बन सकता है जो समाज की मुख्य धारा से अलग हैं और जिनकी आवाज़ को दबाया जाता रहा है।
  • वर्तमान में सोशल मीडिया कई व्यवसायियों के लिये व्यवसाय के एक अच्छे साधन के रूप में कार्य कर रहा है।
  • सोशल मीडिया के साथ ही कई प्रकार के रोज़गार भी पैदा हुए हैं।
  • वर्तमान में आम नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाने के लिये सोशल मीडिया का प्रयोग काफी व्यापक स्तर पर किया जा रहा है।
  • कई शोधों में सामने आया है कि दुनिया भर में अधिकांश लोग रोज़मर्रा की सूचनाएँ सोशल मीडिया के माध्यम से ही प्राप्त करते हैं।

सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव

  • कई शोध बताते हैं कि यदि कोई सोशल मीडिया का आवश्यकता से अधिक प्रयोग किया जाए तो वह हमारे मस्तिष्क को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है और हमे डिप्रेशन की ओर ले जा सकता है। 
  • सोशल मीडिया साइबर-बुलिंग को बढ़ावा देता है।
  • यह फेक न्यूज़ और हेट स्पीच फैलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • सोशल मीडिया पर गोपनीयता की कमी होती है और कई बार आपका निजी डेटा चोरी होने का खतरा रहता है।
  • साइबर अपराधों जैसे- हैकिंग और फिशिंग आदि का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से धोखाधड़ी का चलन भी काफी बढ़ गया है, ये लोग ऐसे सोशल मीडिया उपयोगकर्त्ता की तलाश करते हैं जिन्हें आसानी से फँसाया जा सकता है।
  • सोशल मीडिया का अत्यधिक प्रयोग हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।

सोशल मीडिया और भारत 

  • सोशल मीडिया ने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को भी समाज की मुख्य धारा से जुड़ने और खुलकर अपने विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर दिया है।
  • आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में भारत में तकरीबन 350 मिलियन सोशल मीडिया यूज़र हैं और अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2023 तक यह संख्या लगभग 447 मिलियन तक पहुँच जाएगी।
  • वर्ष 2019 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उपयोगकर्त्ता औसतन 2.4 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं।
    • इसी रिपोर्ट के मुताबिक फिलीपींस के उपयोगकर्त्ता सोशल मीडिया का सबसे अधिक (औसतन 4 घंटे) प्रयोग करते हैं, जबकि इस आधार पर जापान में सबसे कम (45 मिनट) सोशल मीडिया का प्रयोग होता है।
  • इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया अपनी आलोचनाओं के कारण भी चर्चा में रहता है। दरअसल, सोशल मीडिया की भूमिका सामाजिक समरसता को बिगाड़ने और सकारात्मक सोच की जगह समाज को बाँटने वाली सोच को बढ़ावा देने वाली हो गई है।
  • भारत में नीति निर्माताओं के समक्ष सोशल मीडिया के दुरुपयोग को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन चुकी है एवं लोगों द्वारा इस ओर गंभीरता से विचार भी किया जा रहा है।

सोशल मीडिया का दुरुपयोग

  • आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में फेसबुक, ट्विटर समेत कई साइटों पर 3,245 आपत्तिजनक सामग्रियों के मिलने की शिकायत की गई थी जिनमें से जून 2019 तक 2,662 सामग्रियाँ हटा दी गईं थीं।
    • उल्लेखनीय है कि इनमें ज़्यादातर वह सामग्री थी जो धार्मिक भावनाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान का निषेध करने वाले कानूनों का उल्लंघन कर रही थी। इस अल्पावधि में बड़ी संख्या में आपत्तिजनक सामग्री का पाया जाना यह दर्शाता है कि सोशल मीडिया का कितना ज़्यादा दुरुपयोग हो रहा है।
  • दूसरी ओर सोशल मीडिया के ज़रिये ऐतिहासिक तथ्यों को भी तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। न केवल ऐतिहासिक घटनाओं को अलग रूप में पेश करने की कोशिश हो रही है बल्कि आज़ादी के सूत्रधार रहे नेताओं के बारे में भी गलत जानकारी बड़े स्तर पर साझा की जा रही है।
  • विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सोशल मीडिया के माध्यम से गलत सूचनाओं का प्रसार कुछ प्रमुख उभरते जोखिमों में से एक है।
  • यकीनन यह न केवल देश की प्रगति में रुकावट है, बल्कि भविष्य में इसके खतरनाक परिणाम भी सामने आ सकते हैं। अतः आवश्यक है कि देश की सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए इसे पूरी तरह रोकने का प्रयास करना चाहिये।

सोशल मीडिया और फेक न्यूज़ संबंधी नियम-कानून

  • भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पहले से ही सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2008 के दायरे में आते हैं।
  • यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अदालत या कानून प्रवर्तन संस्थाओं द्वारा किसी सामग्री को हटाने का आदेश दिया जाता है तो उन्हें अनिवार्य रूप से ऐसा करना होगा।
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्टिंग तंत्र भी मौजूद हैं, जो यह पता लगाने का प्रयास करते हैं कि क्या कोई सामग्री सामुदायिक दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रही है या नहीं और यदि वह ऐसा करते हुए पाई जाती है तो उसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाता है।
  • भारत में फेक न्यूज़ को रोकने के लिये कोई विशेष कानून नहीं है। परंतु भारत में अनेक संस्थाएँ हैं जो इस संदर्भ में कार्य कर रही हैं-
    • प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया: एक ऐसी ही नियामक संस्था है जो समाचार पत्र, समाचार एजेंसी और उनके संपादकों को उस स्थिति में चेतावनी दे सकती है यदि यह पाया जाता है कि उन्होंने पत्रकारिता के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।
    • न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन: निजी टेलीविजन समाचार और करेंट अफेयर्स के प्रसारकों का प्रतिनिधित्व करता है एवं उनके विरुद्ध शिकायतों की जाँच करता है।
    • ब्रॉडकास्टिंग कंटेंट कंप्लेंट काउंसिल: टीवी ब्रॉडकास्टरों के खिलाफ आपत्तिजनक टीवी कंटेंट और फर्ज़ी खबरों की शिकायत स्वीकार करती है और उनकी जाँच करती है।

सोशल मीडिया और निजता का मुद्दा 

  • वर्तमान परिदृश्य भारत को डिजिटल सेवाओं के लिये एक नवीन डिजाइन तैयार करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं, जिसमें व्यक्तिगत और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों का समावेश हो।
  • निजता संरक्षण, डेटा संरक्षण से जुड़ा विषय है क्योंकि जब कोई व्यक्ति किसी डिजिटल पहचान द्वारा इंटरनेट माध्यम का प्रयोग करता है तो उस दौरान विभिन्न डाटाओं का संग्रह तैयार हो जाता है जिससे बड़ी आसानी से उपयोगकर्त्ता के निजी डाटा को प्राप्त किया जा सकता है।
  • अतः डेटा संरक्षण ढाँचे के डिज़ाइन में महत्त्वपूर्ण चुनौती डिजिटलीकरण के उपयोग से दीर्घकालिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना तथा इसके साथ ही गोपनीयता को बनाए रखना भी है।
  • भारत में प्रभावी डेटा संरक्षण के लिये डेटा नियामकों के पदानुक्रम और एक मजबूत नियामक ढाँचे  की आवश्यकता होगी, जो जटिल डिजिटल सेटअप और आम सहमति के अलावा हमारे मूल अधिकारों की रक्षा कर सके।

निष्कर्ष 

  • पिछले वर्ष भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान ग्वालियर के अध्ययन में बताया गया कि भारत आने वाले 89 फीसदी पर्यटक सोशल मीडिया के ज़रिये ही भारत के बारे में जानकारियाँ प्राप्त करते हैं। यहाँ तक कि इनमें से 18 फीसदी लोग तो भारत आने की योजना ही तब बनाते हैं जब सोशल मीडिया से प्राप्त सामग्री इनके मन में भारत की अच्छी तस्वीर पेश करती है।
  • सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को नया आयाम दिया है, आज प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी डर के सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार रख सकता है और उसे हज़ारों लोगों तक पहुँचा सकता है, परंतु सोशल मीडिया के दुरुपयोग ने इसे एक खतरनाक उपकरण के रूप में भी स्थापित कर दिया है तथा इसके विनियमन की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। अतः आवश्यक है कि निजता के अधिकार का उल्लंघन किये बिना सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिये सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर नए विकल्पों की खोज की जाए, ताकि भविष्य में इसके संभावित दुष्प्रभावों से बचा जा सके।





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